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है आज रुख़ हवा का मुआफ़िक़ तो चल निकल
कल की किसे ख़बर है किधर की हवा चले
इश्क की दुनिया के कायल सब है
कोई कह देता है
कोई छुपा लेता है
मगर
घायल सब हैं
बेशक कुरानो को सिर्फ पता होगा सही गलत का फैसला..
तुझे सीने से लगाने के लिए कोई एक पन्ना जला सकू, तो बात बने...!!

दिल के रिश्तों की नजाकत को वो क्या समझे ....
नरम लफ़्ज़ों से भी चोटें लग जाती हैं अक्सर
मतलब हम नज़र में तो है...